शकुंतला देवी की जीवनी | A biography Of “Human Computer” Shakuntala Devi

दोस्तों क्या आपमें से किसी ने यह सोचा है?कि जिस कंप्यूटर को इंसान ने बनाया जो कैलकुलेशन में इंसान से कई गुना तेज है?

और क्या कोई इंसान अपने ही बनाये गए कंप्यूटर से इतना तेज हो सकता है? कि कंप्यूटर से तेज का कैलकुलेशन कर सके?

नहीं ना? हमें बनाने वाले भगवान ने हम सब में कोई न कोई कौशल जरूर दिए हैं जिससे हम अपने जीवन को सफलता से जी सकें, आगे बढ़ सकें। हम इंसानों में से अधिकतर अपने क्षमता को पहचान नहीं सकते और कई अपनी क्षमता को पहचान कर उसे और विकसित कर इतिहास बना लेते हैं। इसके लिए जरूरत है कि हमें अपने कौशल को पहचानने की।

ऐसे ही एक अद्भुत महिला की आज बात करते हैं जिन्हे पूरी दुनिया में “मानव कंप्यूटर” के नाम से जानते हैं जो अपने समय के सबसे तेज मानें जाने वाले कम्प्यूटरों को भी अपने गणना करने की अद्भुत विलक्षण से मात दी थी।

जी हाँ हम बात कर रहें हैं ” भारत की प्रसिद्द जानीमानी गणितज्ञ, ज्योतिषी, लेखिका और समाजसेविका “शकुंतला देवी ” की|

शकुंतला देवी हमारे देश की प्रसिद्द गणितज्ञ, ज्योतिषी, लेखिका और समाज सेविका हैं जिहोने अपने कड़ी मेहनत और लगन से अपने गणितीय कौशल को इतना विकसित कर लिया कि उन्हें देश ही नहीं विश्व में “मानव कंप्यूटर” की संज्ञा दी गई और इसी वजह से उनका नाम 1982  में  “The Guinness Book Of World Record”  में दर्ज है।

आज का ये पोस्ट उनके ही जीवन पर आधारित है जिसमे उनके बचपन से लेकर अंतिम समय तक के उनके जीवन के कुछ रोचक तथ्य हम आपके लिए लाये हैं जिनके बारे में पढ़ कर आपको अपने देश की महान गणितज्ञ, ज्योतिषी, समाज सेविका “शकुंतला देवी” के बारे में जान सकें।

जन्म और प्रारंभिक जीवन:

शकुंतला देवी का जन्म 4 नवम्बर, 1929 को बैंगलोर, कर्नाटक में  एक रूढ़िवादी कन्नड़ ब्राम्हण परिवार में हुआ था। शकुंतला देवी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था इसलिए वे अपनी औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकीं। जब इनके पिता युवा थे तब उन्होनें मंदिर में पुजारी बनने से मना कर दिया था और एक सर्कस में एक रस्सी पर चलकर दिखाए जाने वाले करतब के द्वारा लोगों का मनोरंजन करने लगे।

एक बार जब शकुंतला देवी जब मात्र तीन वर्ष की थीं तब अपने पिता के साथ ताश के पत्ते खेल रहीं थीं तब उन्होंने अपने पिता को उस खेल में हरा दी।  उसके बाद उनके पिता को शकुंतला के विलक्षण क्षमता और असामान्य स्मरण शक्ति का आभास हुआ। इसके बाद उनके पिता ने सर्कस की नौकरी छोड़ शकुंतला के प्रतिभा, क्षमता को और विकसित करने जगह-जगह सार्वजनिक प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। लेकिन शकुंतला को अपने पिता के द्वारा किये गए सार्वजनिक प्रतिभा प्रदर्शन से पहचान नहीं मिली।

शकुंतला देवी जब 6 वर्ष की हुईं तो मैसूर विश्वविद्यालय में एक बड़े कार्यक्रम में अपनी गणितीय गणना का प्रदर्शन किया। जब शकुंतला देवी 15 वर्ष की हुईं तो राष्ट्रीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इन्हे पहचान मिलती गयी। उसके 2 वर्ष बाद अन्नामलाई विश्वविद्यालय में प्रदर्शन किया और उसके पश्चात् ओस्मानिया, हैदराबाद और विशाखापट्नम गयी जहाँ उन्होंने अपने कौशल का प्रदर्शन किया तब तक उनकी ख्याति पुरे विश्व में फ़ैल चुकी थी। इसके बाद शकुंतला देवी 1944 में अपने पिता के साथ लंदन चली गयी।जहाँ पर उन्होंने बहुत से संस्थाओं में अपने अद्वितीय कला का प्रदर्शन किया। जब शकुंतला देवी 16 वर्ष की थीं तो उन्होंने जब 13 अंकों की संख्याओं का गुणनफल को सिर्फ 28 सेकंड में निकाल कर उस समय दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर को भी 10 सेकंड के अंतर से हराया था तब इनकी प्रसिद्धि और ज्यादा हुई।

“मानव कंप्यूटर” कैसी बनी???

यह उन दिनों की बात है जब शकुंतला देवी 1950 में यूरोप का दौरा कर रहीं थीं। तब वहां 5 अक्टूबर, 1950 को प्रसिद्ध ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट लेस्ली मिशेल ने बीबीसी के एक विशेष कार्यक्रम की मेजबानी किये, जहाँ उन्होंने माथेमैटिक और कैलेंड्रिक समस्याओं को बड़ी आसानी से हल कर दिया।  बीबीसी के इस कार्यक्रम के बाद उन्हें ” मानव कंप्यूटर” कहा जाने लगा।

विवाह पश्चात् जीवन:

भारत वापसी के पश्चात्श शकुंतला का विवाह 1960 में कलकत्ता के एक परिरोश बनर्जी के साथ हुआ जो कलकत्ता में एक इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (IAS) के थे। उनका वैवाहिक सम्बन्ध बहुत दिनों तक नहीं चला और वे 1979 में अपने पति से अलग हो गईं।उसके बाद 1980 में अपनी बेटी के साथ वापस बैंगलोर आ गईं और राजनीतिज्ञों और मशहूर हस्तियों को ज्योतिष परामर्श देने लग गईं।

प्रतिभा का प्रदर्शन:

सितम्बर, 1973 को विश्व बाहर में प्रसारित होने वाले रेडियो चैनल बीबीसी द्वारा आयोजित किये एक “नेशन वाइड” प्रोग्राम में उस समय के प्रसिद्ध मेजबान बॉब वेल्लिंग्स ने गणित से सम्बंधित सवाल किये और उन सभी जटिल सवालों का शकुंतला देवी ने एकदम सही-सही उत्तर दिया जिसके बाद वहां उपस्थित लोग आश्चर्य चकित हो गया। इस तरह से शकुंतला देवी की पसिद्धि भारत ही नहीं पुरे विश्व में फ़ैल गई।

201 अंको का नंबर और 23rd  रुट:

हर कोई समय-समय पर उनकी बुद्धि कौशल की परीक्षा लेना चाहता था अतः उन्हें एक बार अमेरिका के दक्षिणी विश्वविद्याला, डलास द्वारा 1977 में आमंत्रित किया गया। जहाँ पर उन्हें 201 अंको का नंबर दिया गया और उसका उसका 23rd  रुट बताने को कहा गया। शकुंतला ने सिर्फ 50 सेकंड में ही उसका सही जवाब दे दिया। UNIVAC 1101 ने इसका उत्तर देने में 62 सेकंड का समय लिया और कंप्यूटर में देखने के लिए उस ब्यूरो स्टैण्डर्ड को एक विशेष प्रकार का प्रोग्राम करना पढ़ा था। सभी उनके इस तरह इतनी तेजी से गणना करने की क्षमता से हैरान थे |

वे नम्बर थे-

9,167,486,769,200,39158,

0,986,609,275,853,80162,

4,831,066,801,443,08622,

4,071,265,164,279,34657,

0,408,670,965,932,79205,

7,674,808,067,900,22783,

0,163,549,248,523,80335,

7,453,169,351,119,03596,

5,775,473,400,756,81688,

3,056,208,210,161,29132,

8,455,648,057,801,588,06771

और उसका जॉब था – 5,46,372,891

13 अंको के 2 नंबर का गुना और समय सिर्फ 28 सेकंड:

इसके बाद उन्हें 18 जून, 1980 में  इम्पीरियल कॉलेज, लंदन में अपनी गणितीय कौशल का प्रदर्शन करने आमंत्रित किया गया। जहाँ उन्होंने एक कठिन प्रश्न का एकदम सही उत्तर कुछ ही सेकंड में देकर वहां पर उपस्थित सभी लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया। दरअसल में शकुंतला देवी को वहां के कंप्यूटर विभाग द्वारा Ramdomly १३ अंको की संख्या 7686369774870 x 2465099745779 से गुना करने कहा जिसका उन्होंने बड़ी ही आसानी से  सिर्फ 28 सेकंड में सही उत्तर दे दिया और वो उत्तर 18947668177995426462773730 था। इसे 1982 में Guinness Book  Of  World  Record  में दर्ज किया गया।

लेखक स्टीवन ने उनके लिए कहा है :

“यह परिणाम अब तक की सब चीजों से उत्तम है। इसे केवल अविश्वसनीय शब्द से ही वर्णित किया जा सकता है।”

लेखन कार्य:

शकुंतला देवी गणितीय गणना में बौद्धिक रूप से तेज होने के साथ-साथ शकुंतला एक अच्छी लेखिका भी थीं। उन्होंने गणित, ज्योतिष, पज़ल्स से जुड़े हुए किताबें लिखी हैं। जिनमें प्रमुख हैं-

  • Astrology For You
  • In The Wonderland Of Numbers
  • Mathability: Awaken The Math Genius In Your Child
  • Perfect Murder
  • Puzzles To Puzzle You
  • Super Memory: It Can Be Yours
  • The World Of Homosexuals

मानसिक गणना पर आधारित पुस्तक: The mental Calculations Book:

दुनिया में सभी लोग अपनी सिद्धि-प्रसिद्धि को रहस्य ही रखतें हैं लेकिन शकुंतला देवी उन लोगों में से नहीं थीं इसलिए उन्होंने मानसिक गणना पर आधारित किताब “Fingering: The Joy Of Numbers” लिखीं। इस पुस्तक में उन्होंने मानसिक गणना के अनेको तरीके सार्वजानिक किये हैं, जिसे पढ़ कर कोई भी इसका लाभ ले सकता है। इसके अतिरिक्त और कई माध्यमों एक द्वारा उन्होंने अपने गणना के रहस्य को सार्वजनिक किया है।

राजनीति में कदम:

शकुंतला देवी बहुमुखी प्रतिभा की धनी होने के साथ साथ उन्होंने वर्ष 1980 में राजनीति में भी जोर आजमाया। उनका चुनाव क्षेत्र दक्षिण मुंबई था और मेडक को अब तेलंगाना का एक भाग है से लड़ी थीं। मेडक में उनकी प्रतिद्वंदी दिग्गज राजनेता “इंदिरा गाँधी” थीं। चुनाव के समय उन दिनों उनका नारा था –

“मैं इंदिरा गाँधी द्वारा मेडक की जनता को मुर्ख बनाये जाने से बचाना चाहती हूँ”

 उस चुनाव में उन्होंने से कुल 6514 वोटों के साथ 9वें स्थान पर रहीं।

निधन:

शकुंतला देवी अपनी आखिरी दिनों में बहुत कमजोर हो गयीं थीं। शकुंतला देवी की वर्ष 2013 में अचानक तबियत ख़राब हो गयी उसके बाद उन्हें बैंगलोर के एक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 2 हफ्ते तक भर्ती होने के बाद अचानक दिल का दौरा और गुर्दे की समस्या भी हो गयी जिसके इलाज के पश्चात् उनका निधन 21 अप्रैल, 2013 को हो गया।

विभिन्न पुरुस्कार और सम्मान:

  • वर्ष 1969: फिलीपीन्स विश्वविद्यालय द्वारा “वर्ष की विशेष महिला” का पुरुस्कार और गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया था।
  • वर्ष 1988: वाशिंगटन डीसी में उन्हें “रामानुजन मैथमेटिकल जीनियस पुरुस्कार” से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 1982: असामान्य गणितीय गणना प्रतिभा के लिए उनका नाम “गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड” में नाम दर्ज किया गया।
  • वर्ष 2013: उन्हें उनकी मृत्यु के एक माह पूर्व ही “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से मुंबई में सम्मानित किया था।
  • वर्ष 2013: उनके जन्म के 84वें वर्ष गांठ के उपलक्ष्य में गूगल द्वारा “गूगल डूडल” समर्पित करके उन्हें सम्मान दिया गया।

फिल्म:

वर्ष 2020 में शकुंतला देवी के ऊपर उनकी बायोपिक “शकुंतला देवी” बनी है जिसमे शकुंतला देवी का किरदार मशहूर अभिनेत्री “विद्या बालन” ने निभाया है और निर्देशन अनु मेनन ने किया है।

आज हमने शकुंतला देवी “The Human Computer” के बारे में जाना कि वे किस तरह से प्रसिद्ध हुईं और उन्होंने क्या-क्या किया। उनकी इस जीवनी से आपको भी निश्चित रूप से जीवन में कुछ करने कि प्रेरणा जरूर मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि शकुंतला देवी के बारे में यह पोस्ट आप सबको बहुत पसंद आयी होगी। इसके बारे में यदि आपके पास कोई सुझाव हो या अतिरिक्त जानकारी हो तो हमें अवश्य बताएं ताकि हम उसे अपने पोस्ट में निश्चित ही प्रकाशित करने के बारे में विचार करेंगे।

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