महान उद्योगपति, अच्छे प्रेरक जे.आर.डी. टाटा | J.R.D. Tata – A Biography In Hindi

क्या आपने भारत के दिग्गज कंपनियों में से एक टाटा ग्रुप का नाम सुना है???

नहीं ना?

टाटा के कंपनियों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं जिनका नाम नीचे दिया गया है:-

टाटा टी,    

टाटा नमक,

टाटा मोटर्स,

टाटा इंडस्ट्रीज,

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज(भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी है)

और एयर इंडिया

क्यूँ? एयर इंडिया का नाम देख कर सोच में पढ़ गए ना कि यहाँ एयर इंडिया का नाम क्यों लिखा है? तो चलिए आज हम एयर इंडिया के फाउंडर और हमारे भारत के बिज़नेस टाइकून जे.आर.डी. टाटा की बात बताते हैं कि कैसे?टाटा एयर इंडिया की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर एयर इंडिया बनी।

आज हम बात करते हैं हमारे देश के महान उद्योगपतियों में से एक जे आर डी टाटा की जिन्हें “भारतीय नागरिक उड्डयन का जनक” कहा जाता है, इन्होने ही टाटा एयर लाइन्स की शुरुआत की जो आगे भविष्य में देश की राष्ट्रीय विमानन सेवा एयर इंडिया बनी। जे आर डी टाटा पायलट का एग्जाम पास करने वाले पहले भारतीय भी हैं।उनका कहना था-

 “जिंदगी को कुछ खतरनाक ढंग से जियो “… जे.आर.डी. टाटा

भारतीय उद्योग जगत के सबसे सफलतम उद्योगपतियों में से एक जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा  का नाम तो आप सबने सुना ही होगा वो एक कुशल, निडर पायलट और समय से कहीं आगे सोचने वाले एक विजनरी थे।

किसी भी देश के  विकास के लिए कई अतिआवश्यक उद्योगों की जरूरत होती है। जे आर डी टाटा ने स्टील, होटल, रक्षा और इंजीनियरिंग के साथ-साथ अन्य कई महत्त्वपूर्ण उद्योगों के विकास में अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। उनके इन्ही अभूतपूर्व योगदान के लिए उनके सम्मान में उन्हें भारत सरकार के द्वारा वर्ष 1955 में पद्म विभूषण और वर्ष 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

जन्म, बचपन  और स्कूली शिक्षा

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 में फ्रांस के पेरिस शहर में एक मशहूर भारतीय पारसी परिवार में हुआ। उनके पिताजी रतनजी दादाभाई टाटा एक सफल उद्यमी थे और माता सुज्जेन ब्रीरे थीं जो एक फ़्रांसिसी थीं।

J.R.D. Tata की बचपन का अधिकांश समय फ्रांस में ही बीता था इसलिए उनकी पहली भाषा फ्रेंच ही थी। उन्होंने में पेरिस के Janson De Sailly School में स्कूली पढाई पूरी किये। उनकी शिक्षा फ्रांस, जापान, और इंग्लैंड जैसे अलग-अलग देशों में हुई।

उनके पिताजी ने उन्हें सन 1923 में उनकी अंग्रेजी में पकड़ और मजबूत करने, ज्ञान बढ़ने के लिए ब्रिटेन भेजा ताकि ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन हो सके। ब्रिटेन जाकर उन्होंने ने Grammer School में अंग्रेजी के ज्ञान हासिल किया और कोर्स पूरा करने के बाद  कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढाई करने की सोचने लगे। उन दिनों फ्रांस में एक नया कानून बनाया गया था जिसमे फ्रांस के हर युवा को 20 वर्ष की आयु में फ़्रांसिसी सेना में भर्ती होना अनिवार्य था इसलिए वे फ्रांस के सेना में भर्ती हो गए। उनका मन सेना में ही रहने का था लेकिन उनके पिताजी उन्हें सेना में नहीं रहने दिए बल्कि वे उन्हें बिज़नेस संभालना सीखाना चाहते थे।

उनकी नियति कहीं और थी इसलिए क्यूंकि जिस रेजिमेंट में वे भर्ती हुए थे उन्हें एक मिशन आर मोरक्को भेजा गया था जिसमे सारे सैनिक मारे गए थे। इसके बाद वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग पढाई करने की सोचे लेकिन उनके पिताजी ने उन्हें भारत बुला लिए।

J.R.D. Tata, 1925 में भारत आ गए और यहाँ आने के बाद वे अप्रेंटिसशिप करने लगे जिसके लिए उन्हें कोई तनख्वा नहीं मिलती थी। J.R.D. Tata  की माता जी का निधन 1922 में ही हो चूका था और फिर 1926 में जब वे 22 साल के हुए उनकी पिताजी की भी मृत्यु हो गयी। अतः उन्हें 1926 में टाटा ग्रुप का बोर्ड मेंबर चुना लिया गया।

भारत के नागरिक उड्डयन के जनक

उन्होंने सन 1929 में फ्रांस की नागरिकता छोड़ कर भारत की नागरिकता ले ली। उन्होंने 1929 में ही पायलट की परीक्षा पास की और पायलट का एग्जाम पास करने वाले भारत के पहले भारतीय बने।

वे समय से आगे की सोचने वाले विजनरी ही थे जो भारत में विमान सेवा की आवश्यकता को समझा और 1932 में भारत में “टाटा एयर लाइन” की शुरुआत की, जिसे आगे आने वाले समय में परिवर्तित कर भारत की राष्ट्रीय विमानन सेवा “एयर इंडिया” बनी, यही वजह है कि उन्हें “भारतीय नागरिक उड्डयन का जनक” कहा जाता है।

जैसा कहा उन्होंने वैसा किया भी

उनका कहना था-

“जिंदगी को कुछ खतरनाक ढंग से जियो “… जे.आर.डी. टाटा

1932 में “Tata Airline Company”  की शुरुआत हुई और 05 अक्टूबर, 1932 को “द लेपर्ड मॉथ” एयरक्राफ्ट को उड़ा कर मुंबई से करांची आये थे। Tata Airline की पहली एयरक्राफ्ट उड़ाने का साहसिक काम भी खुद ही किये उनका यह कारनामा उन दिनों सच में साहसिक और प्रशंसा योग्य कदम था। उन्होंने उसी एयरक्राफ्ट को 1962 में 58 वर्ष की आयु में और 1982 में 78 वर्ष की आयु में फिर से उसी रुट में विमान उड़ाए।

चैयरमेन के पद पर कार्यकाल

J.R.D. Tata को सन 1938 में 34 वर्ष की आयु में Tata & Sons का चैयरमेन चुना गया और इस तरह वे भारत के सबसे बड़े Industrial  Group के सबसे युवा मुखिया बन गए। जब J.R.D. Tata चैयरमेन बने तो उस समय टाटा ग्रुप में 14 उद्यम ही थे जिन्हे अपने Retire के समय तक ९५ तक पहुंचा दिए। वे 50 साल तक चैयरमेन रहे, 50 साल से अधिक समय तक चैयरमेन के पद पर कार्य करना भी एक बहुत कीर्तिमान है। उन्होंने अपने चैयरमेन के पद पर रहते हुए अपने टाटा ग्रुप के सभी ब्रांड को भारत के हर घर में पहुंचा दिए।

भारत में कर्मचारी कल्याण योजना की शुरुआत

J.R.D. Tata ने अपने कर्मचारियों के लिए कर्मचारी कल्याण योजना शुरू की जिससे वो अपने कर्मचारियों को अधिक सुविधा और सुरक्षा का लाभ दे सकें। ये उनकी अपने कर्मचारियों के लिए कल्याण करने की सोच की भावना का ही परिणाम है जिसे भारत सरकार द्वारा कामगार मुआवजा अधिनियम(वर्कर कंपनसेशन एक्ट) में शामिल किया गया इसलिए उन्हें “कर्मचारी कल्याण योजना” का जनक भी कहा जा सकता है।

J.R.D. Tata का जीवन में हमेशा नैतिकता और सदाचार का रास्ता अपनाते हुए हमेशा भ्रष्टाचार से कोसों दूर रहा। यही वजह है कि Tata Group हमारे देश का सबसे विश्वश्नीय बिज़नेस हाउस आज तक बना हुआ है।

उदारवादी भावना

JRD  टाटा हमेशा उदारतावाड़ी ही रहे, किसी भी मुश्किल के समय वो हमेशा एक लीडर की तरह सबसे आगे रहते और जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते और जब भी सफलता मिलती तो उसका सारा श्रेय अपने कर्मचारियों को ही देते थे। Retirement  तक Tata Group साल का मुनाफा 10000 करोड़ रूपये से भी अधिक था लेकिन इस कामयाबी का पूरा श्रेय उन्होंने अपने ग्रुप के कर्मचरियों को ही दिया। इसलिए उनके ही रास्ते पर रतन टाटा भी चले और इस ग्रुप ने अपने कर्मचारियों की छटनी Covid19  जैसे World  Epidemic के समय भी नहीं की।

निधन:

उनका देश कि प्रगति में अतुल्य योगदान है। 29 नवम्बर, 1993 को गुर्दे के संक्रमण के कारण उनका निधन 89 वर्ष में जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में हो गया। उनके निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए संसद का सत्र भी स्थगित कर दिया गया था। निधन के बाद उन्हें उनके जन्म शहर पेरिस, फ्रांस में ले जाकर  वहां के पेरे लेचसे कब्रिस्तान में दफनाया गया था। आज हम उनकी महान शख्शियत को स्मरण करते हुए नमन करते हैं जिनके योगदान की ही वजह से आज भारत में कई लोग रोजगार पा रहें हैं।

पुरुस्कार और सम्मान :

JRD  Tata  को कई पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया है जिसमे शामिल हैं:-

भारत के वायु सेना द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है:-

ग्रुप कैप्टैन की मानद पद से

    एयर कोमोडोर पद

    और फिर 01 अप्रैल, 1964 में उन्हें एयर वॉइस मार्शल का पद दिया गया।

    1954 में उन्हें फ्रांस ने अपने सर्वोच्च नागरिकता पुरुस्कार “लीजन ऑफ़ थे ऑनर” से सम्मानित हुए

    1955 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

    1979 में उन्हें टोनी जेनस पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।

    1983 में फ़्रांसिसी सेना का सम्मान दिया गया।

    1985 में फेडरेशन के गोल्ड एयर मैडल एयरोनॉटिक इंटरनेशनल से सम्मानित हुए ।

    1986 में कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन द्वारा एडवर्ड वार्नर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    1988 में डैनियल गगनगेम मैडल से सम्मानित हुए।

    1992 में उनके द्वारा किये गए निस्वार्थ मानवतावादी प्रयासों के कारण भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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