आखिर ध्यान की जरुरत हमें क्यों पड़ती है??? | Why We Need meditation???

आज के समय में जीवन

आजकल के इस तनाव भरी जिंदगी ने हम सभी के जीवन को उलझा कर रख दिया है। आज हर कोई किसी न किसी परेशानी उलझन में दिन बीता रहा है किसी को अपने ऑफिस का उलझन तो किसी को घर का उलझन। और हममे से अधिकतर लोग इस तनाव और उलझन से भरे जीवन से निकला भी नहीं पाते और दूसरी उलझन और परेशानी आ जाती है। इस तरह हमारे जीवन में आने वाली ये परेशानियां और उलझन हमे काफी प्रभावित करती है।

दोस्तों चलिए आज हम इस टॉपिक को शुरू करने से पहले ये जानते हैं कि ये उलझन कि शुरुआत ही कहाँ से होती है, हम इस जीवन के उलझन में फंसते ही क्यों है? हम अपने इन परेशानियों, उलझनों से निकल क्यों नहीं पाते? जीवन में इतनी साड़ी परेशान्यां आती ही क्यों है?

आप सभी ये तो जानते ही होंगे कि जीवन में परेशानियां,उलझनों का आना जरुरी है। आप सभी को लगता है तो कि जब परेशानियां आती है तो साथ में दुःख भी लाती है और हर कोई इससे निकलने के लिए कोशिश करने लगता है, हर कोई अपने ऊपर आने वाली परेशानियों से निकल कर अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहता है। दोस्तों परेशानियां जीवन में इसलिए आती है ताकि हम इसका सामना कर सके और यही परेशानियां हमे और निखार कर आगे आने वाली परेशानियों और उलझनों के लिए मजबूत बनाती है ताकि हम उसका सामना मजबूती से कर सके।

ध्यान की आवश्यकता क्यों? Why We Need Meditation?

दोस्तों हमारे दिमाग का जो तंत्र है वो दिमाग के अंदर कुछ आगत पर काम करती है। हमारे दिमाग में जो भी आगत या इनपुट आती है वो आसपास के हमारे परिवेश, हमारे माता-पता से, हमारे स्कूल के शिक्षा से, और वो किताब से जो हम पढ़ते हैं, से आती है। हमारे दिमाग में इनपुट आती है जब हम कोई फिल्म देखते हैं, हमारे चारों ओर रहने वाले लोगों के विचारों से जिनके साथ हम रहते हैं और बात करते हैं।

ये सभी वो स्रोत है जिनसे हमारा दिमाग इनपुट लेता है और अपने अंदर उसे प्रोसेस करता है और उसे सुरक्षित रखता है। इन्ही कारणों से हमारे अंदर अनुभूति का सृजन होता है और इसी से ही हमारे मनोदृष्टि भी बनती है जिससे हम दुनिया को देखते हैं और हम दुनिया के सामने अपने व्यव्हार में लाकर प्रस्तुत करते हैं।

अब हमारे साथ परेशानी तब शुरू होती है जब हमारे अंदर नकारात्मक अनुभूति या नकारात्मक भावना पैदा होने लगती है जिसके वजह से ही हमारे अंदर की सोच, हमारी सोच सीमित हो जाती है और सीमित सोच होने के कारण ही हम किसी भी चीज के असीमित संभावना को हम देख ही नहीं पाते। इस तरह से हमारा दिमाग कुछ ख़ास और सीमित विचारों में ही उलझा रहता है। हम इन्ही विचारों में उलझे रहते हैं और हमारा दिमाग इससे आगे की नये संभावनाओं के बारे में सोच ही नहीं पाता और ना ही हम अपने परेशानियों का समाधान कर पाते हैं। जिसके कारण हमारे दिमाग में एक और समस्या पैदा होती है और वह है, चिंता(Anxiety), तनाव(Tension), किसी भी दूसरे काम में मन नहीं लगना, किसी काम को ठीक से ना कर पाना इत्यादि।

ध्यान से मानसिक शांति 

जब भी जीवन में कोई समस्या, परेशानी या कोई उलझन आती है तो साथ में अपना समाधान भी लाती है। लेकिन व्यक्ति अपने नकारात्मक सोच और समस्या में उलझे रहने के वजह से ही उस समाधान को पहचान नहीं पता है। जीवन में इन समस्याओं, परेशानियों या उलझनों का बहुत ही अच्छा, सीधा और सरल उपाय है वो है ध्यान (Meditation)

ध्यान हमारे अंदर पैदा होने वाले नकारात्मक सोच, परेशानी और हमारे अंदर के बुराइयों को मिटाने और दूर करने में बहुत ही कारगर उपाय और दवा है। ध्यान से हम अपने जीवन को जीवन के परेशानी से दूर एक अलग ही अनुभूति में कराने में सक्षम हो जाते हैं। ध्यान मनुष्य को लिमिटेड से अनलिमिटेड बन देता है। ध्यान से मनुष्य के दिमाग के साथ-साथ शरीर को भी शांति मिलती है एकाग्रता में वृद्धि होती है और दिमाग तनाव मुक्त रहता है। ध्यान के वजह से हमारे दिमाग में अच्छे विचार आने लते हैं और हमारे सफलता के रास्ते खुल जाते हैं जो तनाव और जीवन के परेशानियों के कारण बंद हो गए थे।

ध्यान के इतने फायदे होने के बाद भी दुनिया में अधिकतर लोग इसके फायदों के बारे में जान नहीं पाते और लाभ से वंचित रह जाते हैं। और इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि उन्हें यह अभी तक पता ही नहीं है कि

ध्यान क्या है? और कैसे ध्यान किया जाता है?

दोस्तों तो चलिए आज हम इस लेख में ध्यान क्या है?  ध्यान की विधियां क्या-क्या हैं?

और शुरुआत के लिए ध्यान की कौन सी विधि सही रहेगी?

आप जब शुरुआत करते हैं तो कैसे इसे शुरू करना चाहिए?

आपके इन सारे सवालों का जवाब बताएंगे।  तो चलिए अब शुरू करते हैं:-

ध्यान आखिर है क्या? What is Meditation?

ध्यान के लिए अंग्रेजी में एक विचार है:-

“Meditation is a journey from the complexity of th mind to the simplicity of the heart.”

“ध्यान मन की जटिलता से दिल की सरलता की यात्रा है।”

इस छोटे से वाक्य ने ध्यान का का पूरा अर्थ ही समझा दिया। जब भी कोई ध्यान के बारे में सुनता है तो उसके दिमाग में यह बात आने लगता है कि ध्यान बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। लेकिन सच यही है कि ध्यान तो एक केक के एक टुकड़े जैसा सीधा और आसान है। जैसे ऊपर दिए गए अंग्रेजी वाक्य में कहा गया है ध्यान एक यात्रा है मन की जटिलता से दिल की सरलता तक का। और ह्रदय की सरलता का मतलब यही है कि सरल, अच्छे, सकारात्मक विचारों वाला तनाव मुक्त दिमाग। जिंदगी में जीने का असली मजा भी तभी आता है जब मन शांत हो और ह्रदय सरल। और तब जीवन में सफलता हमारे से दूर नहीं रहती।

ध्यान करने के क्या-क्या फायदे हैं? What is benefits of Meditation?

ध्यान के तो कई फायदें हैं लेकिन हम यहाँ कुछ मुख्य फायदों  की जानकारी आपको देने जा रहे हैं:-

  • ध्यान से सबसे ज्यादा और बड़ा फायदा यह है कि इससे मन तनाव मुक्त होता है।
  • ध्यान से हमें अपने लक्ष्य की ओर अधिक स्पष्ट दृष्टि मिलती है।
  • ध्यान हमारे अंदर पैदा होने वाले नकारात्मक विचारों को काम करके सकारात्मकता की ओर ले जाता है।
  • ध्यान से हमारे मन में कल्पना और रचनात्मक भावो में वृद्धि होती है।
  • ध्यान हमें बहुत सी बिमारियों अस्थमा, तनाव, अनिद्रा की समस्या, सिरदर्द, उच्च रक्त दबाव जैसे गंभीर बिमारियों से लड़ने में मदद करता है।
  • ध्यान हमारे मन को एकाग्र करके आतंरिक शक्ति को पहचानने में मदद करता है।
  • ध्यान हमें खुद को पहचानने में मदद करता है।
  • ध्यान से मन के एकाग्रता बढ़ती है और साथ में दिमाग की याददाश्त की क्षमता में भी अकालनीय बढ़ोत्तरी होती है।
  • ध्यान से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • ध्यान से हमारा मन विनम्र और सादगी भरा हो जाता है।
  • ध्यान से निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।

ध्यान के विधियां क्या-क्या हैं? What is the various techniques of Meditation?

यूँ तो ध्यान की बहुत सी विधियां हैं लेकिन हम यहाँ कुछ अच्छी, सरल, आवश्यक और कारगर विधियों के बारे में बात करेंगे :-

1st निर्देशित ध्यान

इस ध्यान को हमें करने के लिए किसी गुरु या फिर प्रशिक्षक की जरूरत होती है और उनके बताये गए निर्देशों का पालन करते हुए ध्यान लगते हैं। जो भी ध्यान की शुरुआत करते हैं उनके लिए यह सबसे अच्छा है। इसमें सबसे पहले आपको सीधे आसान में बैठ कर मन को शांत करके अपने श्वास की गति धीमी और सिर्फ नासिका के माध्यम से करते हुए अपना ध्यान सिर्फ श्वास पर केंद्रित करना होता है।

2nd मंत्र ध्यान

इस विधि को भी बड़ी ही सहजता के साथ किया जा सकता है। इस विधि में कुछ मन्त्रों को मन में दोहराते हुए उसपर अपना ध्यान केंद्रित करना होता है।

मंत्र ध्यान की विधि:-

श्वास लेते समय: जब आप श्वास अंदर लें तो इस मन को शांत रख कर धीरे-धीरे अंदर लें।

श्वास छोड़ते समय: जब आप श्वास बहार छोड़ रहे हो तो मन को शांत रख क्र यह सोचिये की आप अपनी सारी चिंताओं को भी बाहर छोड़ रहे हो।

इसी प्रकार इसे दोहराते हुए यह ध्यान किया जाता है। इस ध्यान में “ॐ” मंत्र का भी उपयोग करके किया जा सकता है।

3rd दृश्य ध्यान

यह ध्यान बहुत ही सरल और अच्छा ध्यान है जिसे करने के लिए ज्ञान मुद्रा में मन को शांत कर बैठ जाये। इसके पश्चात आप मन में भगवान द्वारा सृजित दुनिया के कुछ सुन्दर दृश्यों समुद्र का किनारा, फूलों का बगीचा जैसे का मन में कल्पना कीजिये और उस जगह की शांति, सुंदरता, ताजगी और शुद्धता को अपने अंदर महसूस करने की कोशिश कीजिये। यह ध्यान आपके कल्पना करने की शक्ति को बढ़ता है।

4th शांति में आवाज़ को सुनना

यह ध्यान कको करने के लिए आपको सीधे मुद्रा या ज्ञान मुद्रा में बैठ जाना है और फिर मन को शांत करके अपने श्वास को निरीक्षक की तरह उसका निरिक्षण करिये और आप जो श्वास लेते हैं छोड़ते हैं उसकी आवाज़ सुनने को कोशिश कीजिये। प्रारम्भ में इसमें आवाज़ सुनाई नहीं देती लेकिन कुछ समय अभ्यास करने के बाद हमें आवाज़ सुनाई देने लगती है। यह ध्यान हम कहीं भी कभी भी कर सकते हैं।

ध्यान प्रारम्भ करने से पहले क्या करे?

  • सबसे पहले एक शांत स्थान की तलाश करें।
  • शांत स्थान मिलने के बाद ज्ञान मुद्रा या पद्मासन में बैठ जाएँ।
  • पद्मासन या ज्ञान मुद्रा में जब भी बैठे तो आपकी रीढ़ को सीधा रखें।
  • अपने चेहरे को थोड़ा ऊपर उठा कर रखे।
  • जब भी आप ध्यान लगाए तो आपका चेहरा हमेशा पूर्व की तरफ होना चाहिए।
  • अब आँख बंद करके अपने दोनों भौंहों के मध्यान ध्यान को केंद्रित करें और श्वास को ढीला छोड़ दें।
  • यह प्रक्रिया कम से कम 5-10 मिनट तक करें।

दोस्तों आपको ध्यान के बारे में यह जानकारी कैसी लगी? हिंदी में यह लेख आपको अच्छा लगा तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके शेयर जरूर करें।

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