एक नैतिक कहानी – क्या मेरी जिंदगी अच्छी है? | A Motivational Moral Story “My Life Is Good”

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कहानी – क्या मेरी जिंदगी अच्छी है?

दोस्तों हम अपने जीवन में ये अक्सर देखते हैं कि कोई हमसे अच्छा Status And Rich आदमी आता है तो उसे देख कर हम ये सोचने लगते हैं कि यार उसकी जिंदगी तो बहुत मस्त है पैसे हैं, कार है, अच्छा स्टेटस है, लेकिन हम ये नहीं सोचते कि क्या वो उस जगह है तो सच में उसकी जिंदगी अच्छी है? या सिर्फ हम दूसरों के जिंदगी के बारे में ऐसे ही सोच रखते हैं? क्या हमारी खुद अपनी जिंदगी के बारे में ऐसा हमने कभी सोचा है कि क्या सच में “मेरी जिंदगी अच्छी” है!

रमन का जिंदगी

बहुत समय की बात है एक गांव में रमन नाम का एक किसान रहता था। उसके रोजमर्रा का ये काम था कि सुबह जल्दी से उठ क्र खेत जाता और दीं भर पूरे मेहनत और लगन के साथ मन लगाकर काम करता और शाम को घर आता और खाना बनाता फिर खाना खा कर चैन की नींद सो जाता। यही काम फिर दूसरे दिन सुबह से शुरू करता। दिन इसी तरह ही बीत रहा था। लेकिन अचानक रमन को कुछ दिन से एक बात बार-बार परेशां करने लगी। रमन उसी बात के बारे में सोचते रहता और दिनों दिन उस बात के बारे में अधिक सोचने लगा।

एक सेठ का गांव आना

कुछ दिनों पहले ही रमन के गांव में एक सेठ जी किसी काम से आये थे और सेठ जी से रमन मिला भी था। जब रमन उस सेठ जी से मिला तो उसने देखा सेठ जी सूटबूट में थे और वो एक सफ़ेद चमचमाती कार में आये थे ,सेठ जी का स्टेटस गजब का था। जैसे ही सेठ जी कार की गांव में आकर रुकी एक आदमी जल्दी से उतर कर कार का दरवाजा खोलता है। सेठ जी जैसेही कार से बाहर निकलते हैं उनके साथ दो लम्बे कद हट्टे-कट्टे शरीर वाले आदमी अपने हांथों में बन्दुक लिए थे निकलते हैं। वे दोनों सेठ जी के सुरक्षा कर्मी थे जो सेठ जी की सुरक्षा के लिए साथ ही रहते हैं। सेठ जी जहाँ भी जाते वो दोनों आदमी भी उनके साथ पीछे-पीछे चलते थे।

रमन ये सब देखते हुए सोच रहा था की सेठ जी के क्या ठाट-बाट है! काश! मेरे पास भी ऐसी ही एक कार होती और दो लोग मेरे पीछे-पीछे मेरी सुरक्षा के लिए चलते रहते। रमन की नजर सेठ जी के हर चीज पर थी। रमन देखता है सेठ जी ने बहुत ही महंगे सूटबूट पहने हैं जो बहुत सुन्दर दिख रहा था। सेठ जी के सर पर एक सफ़ेद टोपी पहने हुए थे और पैरों में एक सुन्दर नोकदा काले रंग के जुटे जो सेठ जी पर बहुत जँच रहा था। रमन भी ऐसे कार, कपड़ों और पहनावे और उसके शान-शौकत के बारे में सोचने लगा।

सेठ जी गांव में किसानों से मिलने आये थे और किसानों से अनाज खरीदने के उद्देश्य से ही बाट करने आये थे जिससे वह यहाँ से अनाज खरीद कर शहर में ऊँचें दामों में बेंच सके। सेठ जी की इस बारे में बात रमन से भी हुयी थी। तब सेठ जी से बातों ही बातों में रमन को पता चला की सेठ जी की शहर में बहुत बड़ी कोठी है जहाँ बाहर सारे कमरे हैं। सेठ जी से रमन को उनके व्यस्त दिनचर्या और रोजमर्रा के कामों के बारे में भी जानकारी मिली। उसके बाद सेठ जी ने भी रमन में बारे में जानकारी लेने उसके बारे में पूछा।

रमन को तो सिर्फ सेठ जी के ऐश-ओ-आराम की ही धुन थी उसी के बारे में सोचने लगा था कि काश! उसका भी  सेठ जी के जैसे बड़ा घर होता जहाँ वह भी मजे से सोता, अच्छे-अच्छे कपडे पहनता और अलग-अलग जगहों पर घूमता।

सेठ जी के रमन के साथ इस मुलाकात ने रमन के मन में उथल-पुथल मचा कर रख दिया, सेठ जी के रहन-सहन ने रमन में मन को झकझोर क्र रख दिया था और उसका मन थोड़ा भी अपने काम भी नहीं लग रहा था। सेठ जी से मुलाकात के बाद रमन कि नींद, ख़ुशी और चैन न जाने कहाँ खो गया था। रमन में मन में सिर्फ एक ही बाट ध्यान में रहता कि उसे ठीक वैसा ही करना और रहना है जैसे सेठ जी रहते और करते थे।

रमन के मन में सेठ जी के रहन-सहन को देख तरह-तरह के भाव आ रहे थे वह मन में सोचने लगा कि सुबह जल्दी उठना और फिर काम करना, न ही अच्छे कपडे पहनने का समय, न ही शान-शौकत का रहन-सहन यह कैसी जिंदगी है?

इस तरह सोचते हुए रमन ने अपने इच्छाओ को पूरा करने के लिए एक योजना बना लिया। अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह दूसरे दिन अपने ही गांव के घोडा गाड़ी वाले पास पहुँच गया और उसने घोडा गाड़ी 10 दिन के किराये पर ले लिया।

रमन से घोडा गाड़ी को सफ़ेद रंग में रंग दिया और सेठ जी की ही तरह गांव के बेरोजगार दो युवकों को अपने साथ ले लिया। रमन ने उन दोनों युवकों को एक-एक कुल्हाड़ी भी दे दिया ताकि जब भी वह घोडा गाड़ी पर बैठे या कहीं जाये तो वो दोनों उसके साथ-साथ रहे और उसकी सुरक्षा कर सके।

रमन ठीक वैसे ही करते जा रहा था जैसे सेठ जी ने अपने रहन-सहन के बारे में रमन को बताया था। और सेठ जी की ही तरह रमन बड़े घर में रहने के लिए अपने छोटे घर में रहना छोड़ १० दिन के लिए अपने ही गांव के एक बड़े भवन को भी किये में ले लिया। सेठी जी जिस तरह के कपडे पहनते थे ठीक उसी तरह रमन ने भी कपडे और जुटे भी किराये पर ले लिया। अब वह रोज सुबह उठकर अपने किराये के कपडे, जुटे पहनकर उस घोडा गाड़ी में बैठ कर अपने दोनों सुरक्षाकर्मियों के सतह खेत जाने लगा और शाम को अपने किराये के बड़े भवन में आता है वहां अकेले सोता। रमन को इस तरह सेठ जी के तरह व्यव्यहार करते देख कुछ लोग उसका मजाक भी उड़ने लग गए थे। 

दिन ऐसे ही बीतता गया फिर संयोग से एक दिन सेठ जी फिर से रमन के गांव आये और उन्होंने  रमन को यह सब करते देखा। जब सेठ जी को रमन के बारे में यह सब करने के पीछे की बात पता चली कि रमन क्यों ऐसा कर रहा है तो सेठ जी रमन के बारे में सोच कर बहुत हंसने लगे फिर सेठ जी बोले, “रमन! तुम मेरे जैसी जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हो और मैं खुद तुम्हारी जैसी जिंदगी जीने की कोशिश कर रहा हूँ।”

एक बार सोच कर देखो, तुम्हारी जिंदगी में कितना आनंद है। तुम सुबह जल्दी उठ कर सुबह की ताजी हवा लेते हुए मस्त होकर अपनी साईकिल से एकदम निश्चिन्त होकर अपने खेत जाते हो।  खेत में बिना किसी चिंता के अपना काम करते हो और ऐसे ही बिना किसी चिंता के ख़ुशी-ख़ुशी घर आते हो और रात में भोजन करके सोने चले जाते हो। तुम्हारी दिन भर की थकान तुम्हे चैन की नींद दिलाती है और तुम खुश और स्वस्थ भी हो, किसी इंसान को इन चीजों को छोड़ और कुछ चाहिए भी नहीं होता।

चेतन सेठ जी की बात ध्यान से सुनने के बाद उनके बातों से सहमत होता है लेकिन फिर सेठ जी से अचानक पूछता है, “सेठ जी मैं मानता हूँ मैं अपनी जिंदगी से खुश हूँ और मेरी जिंदगी अच्छी है लेकिन उससे अच्छी जिंदगी तो आपकी है। कितने आनंद है आपकी जिंदगी में, राजा जैसी जिंदगी है आपकी।”

रमन के बात को सुनकर सेठ जी बहुत जोर से हँसते हुए बोले, “रमन तुम्हे मेरी जिंदगी अच्छी लगती है और मुझे तो तुम्हारी जिंदगी अच्छी लगती है। क्या तुम्हे ये पता भी है कि इन भरी भरकम कपड़ों को पहनकर रहना कितना मुश्किल काम है और  दिन भर काम कि चिंता अलग।”

ना जाने कब कोई और कौन लूट ले, इसलिए साथ में दो सुरक्षाकर्मी रखे हैं जो ना चाहते हुए भी हर समय अपने साथ रखने ही पड़ते हैं। मैं तो शाम को चिंता की वजह से ठीक से खाना भी नहीं खा पता हूँ और जब सोने के लिए जाता हूँ तो नींद भी नहीं आती, चैन से सो नहीं पाता। सुबह नींद नहीं आने के कारण देरी से उठता हूँ और इस वजह से मई तुम्हारी तरह सुबह की ताज़ी हवा भी नहीं ले पाता हूँ।

सेठ जी के इतना कहने के बाद रमन शांत होकर मन ही मन सोचने लगता है कि सच में मेरी जिंदगी बहुत अच्छी है।

क्या सीखा इस कहानी से आपने? What did you learn from this story?

दोस्तों यहाँ कहानी हमें जीवन कि बहुत बड़ी शिक्षा देती है और वह यह है कि जब भी हम किसी की लाइफ देखते हैं उसके रहन-सहन और Status को देखते हैं तो हम हमेशा उसके जैसा बनना और करने की सोचने लगते हैं और उसके जैसे जीवन जीना शुरू भी कर देते हैं लेकिन क्या आपने यह सोचा है कि उसके वैभवशाली जीवन के पीछे कितना तनावयुक्त जीवन हो सकता है।  इसलिए यह हमेशा कहा जाता है कि दूसरे के जिंदगी जैसे जीना छोड़कर अपने जीवन में ख़ुशी और आनंद से रहो ये सोच कर कि मेरी जिंदगी अच्छी है

दोस्तों आप सबको यह “क्या मेरी जिंदगी अच्छी है? A Motivational Moral Story” हिंदी में कहानी कैसी लगी? कमेंट करके जरूर बताये और यदि कोई सुझाव हो तो उसे भी बताये ताकि हम उसपर विचार करते हुए अपने आने वाले लेख को और अच्छा से तरीके से आपके लिए लेन के लिए कार्य कर सके।

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Nice1-Story

I'm Yogendra Kumar. I have started writing since July, 2020. I like blogging, sharing and writing about the positivity of the world. You can find here Best Motivational Quotes, Success Story, Inspirational Quotes, Biography, Life Inspiring Quotes, Ethics Story, Life Changing Quotes, Motivational Story,Positive Thinking Quotes, Inspirational Story, Success Mantra, Self Development Quotes, Dharma, Home Cure Tips.

This Post Has 2 Comments

  1. Felicity

    Thank you for this article, you really write beautifully

    1. Nice1-Story

      Thank You So much felicity for your valuable comment.

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